Drawings (Vizooka Series)
अवधेश मिश्र की रचनात्मक
अभिव्यक्ति का प्रिय विषय विजूका रहा है जो शुरूआती दौर में सामाजिक विकृति एवं असंतुलन
और नैतिक अवमूल्यन पर कटाक्ष करता था पर दूसरे दौर में वह (विजूका रिटर्न्स) जन-जीवन
का हिस्सा बन गया। यह अवधेश मिश्र की रचनात्मकता की बहुरंगी दुनिया में तो साथ-साथ
रहा ही, सामानांतर रूप से श्वेत-श्याम रेखांकन में भी प्रबल रूप से उभरा, विशेषकर 2003-2008
के बीच रची गयी ‘विस्थापन’ शृंखला में। 2025 के दिसम्बर माह से शुरू हुयी रेखांकन
की इस शृंखला में विजूका तो प्रमुख पात्र है पर उससे अधिक उसके चारों ओर फ़ैली
प्रकृति है जहाँ रेखा केवल आकृति नहीं बनाती; वह स्मृति जगाती है, अनुभूति खोलती है और देखने वाले को भीतर की यात्रा पर ले
जाती है। इसलिए ये ड्रॉइंग्स दिखाई से अधिक सुनाई देती हैं। इन रेखांकनों में महत्त्वपूर्ण है रेखा का
अनुशासन। पेन से खींची गयीं रेखाएँ आवेग में कहीं भटकती नहीं, वे हर घुमाव, हर दबाव, हर
ठहराव पर एक अर्थ और स्पंदन उत्पन्न करती हैं जो दर्शकों की सहयात्री बनती चलती
हैं। हालाँकि इन रेखांकनों में अनुशासन के भीतर एक मुक्तता भी है जिसमें रेखाएं कहीं
साँस लेती है तो कहीं सघन
होती है और कहीं
विराम भी लेती है। कलाकार की आंतरिक दुनिया को दर्शकों के सामने खोलती रेखांकनों
की यह शृंखला अपनी मधुर तानों से समृद्ध वर्णों की मद्धिम रस-फुहार जैसी, तन-मन के
भीगने का अनुभव कराती है।
✌️🙏
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